Zero to One Hindi Audio Book Peter Thiel

जीरो टू वन : अध्याय 3 – कामयाब लोग कुछ अलग करते है

हमारे विरोधाभासी प्रश्न का व्यापारिक संस्करण यह है कि कोई बड़ी कंपनी अपनी इमेज की इमारत क्यों नहीं बना रही है? यह सवाल दिखने में कठिन है, क्योंकि आपकी कंपनी अधिक मूल्यवान होने के बावजूद अधिक वैल्यू बना सकती है। केवल वैल्यू बनाना पर्याप्त नहीं है – आपको अपने द्वारा बनाए गए कुछ मूल्यों को भी अपनाने की आवश्यकता है।

इसका मतलब यह है कि बहुत बड़े व्यवसाय भी खराब व्यवसाय हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी एयरलाइन कंपनियां हर साल लाखों यात्रियों की सेवा करती हैं और सैकड़ों अरब डॉलर कमाती हैं। लेकिन 2012 में, जब औसत विमान किराया $ 178 डॉलर था, तब एयरलाइंस प्रति यात्री केवल 37 सेंट ही लाभ कमा रही थी। हम अगर उनकी Google से तुलना करें, जो कम धन लेकिन लाभ अधिक कमाता है। Google ने 2012 में एयरलाइंस की $ 160 बिलियन डॉलर कमाई के मुकाबले, $ 50 बिलियन डॉलर कमाए, यानि अपने रेवेन्यु का 21% लाभ कमाया – एयरलाइन उद्योग के लाभ मार्जिन से 100 गुना अधिक। Google अकेला इतना पैसा कमाता है जो अमेरिका की सभी एयरलाइंस के संयुक्त लाभ से तीन गुना अधिक है।

Get Zero to One Book : Click Here

एयरलाइंस एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन Google अकेले खड़ा है। अर्थशास्त्री अंतर को समझाने के लिए दो सरलीकृत मॉडल का उपयोग करते हैं: परफेक्ट कम्पीटीशन और मोनोपली।

“परफेक्ट कम्पीटीशन” को अर्थशास्त्र 101 में आदर्श और डिफ़ॉल्ट स्थिति दोनों ही माना जाता है। जब प्रतिस्पर्धी बाजार संतुलित हो तब उत्पादक आपूर्ति और उपभोक्ता मांग समान होते है। प्रतिस्पर्धी बाजार में प्रत्येक कंपनी समान मूल्य पर अपने उत्पादों को बेचती है। चूंकि किसी फर्म के पास कोई मार्केट पावर नहीं है, इसलिए उन्हें बाजार के अनुसार निर्धारित होने वाली कीमतों पर अपना सामान बेचना होता है। यदि यहाँ पैसा बनाया जा रहा है, तो नई कंपनियां बाजार में प्रवेश करेंगी, आपूर्ति में वृद्धि करेंगी, कीमतें नीचे गिराई जायेंगी, और इस तरह वो मुनाफे खत्म हो जायेंगे जो उन्हें पहले मिल रहे थे। यदि बहुत सी कंपनियां बाजार में प्रवेश करती हैं, तो उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ेगा, कुछ बंद हो जाएंगी, और कीमतें निचले टिकाऊ स्तर पर वापस आ जाएंगी। परफेक्ट कम्पीटीशन के अंतर्गत, लंबे समय तक कोई भी कंपनी आर्थिक लाभ नहीं कमा सकती है।

मोनोपली परफेक्ट कम्पीटीशन से एकदम विपरीत है। प्रतिस्पर्धी कंपनी को अपना सामान, बाजार के द्वारा निर्धारित, मूल्य पर बेचना पड़ता है, लेकिन मोनोपली, बाजार का मालिक है, इसलिए यह अपनी कीमतें खुद निर्धारित करता है। चूंकि इसमें कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है, इसलिए इसके उत्पाद की मात्रा व मूल्य तालमेल पर रहते है जो इसके मुनाफे को हमेशा ज्यादा रखते है।

एक अर्थशास्त्री को, प्रत्येक मोनोपली एक जैसी दिखई देती है, भले ही यह नियमों के अनुसार काम करके विवेकपूर्ण रूप से प्रतिद्वंद्वियों को समाप्त करता है, और शीर्ष पर रहकर अपना  रास्ता खुद बनाता है। इस पुस्तक में, हम अवैध या सरकारी पक्षपात की बात नहीं कर रहे हैं: “मोनोपली” से, हमारा मतलब है कि कोई कंपनी वह सामान या सेवा प्रदान करे जिसे कोई दूसरा निकट भविष्य में उपलब्ध न करवा सके। 0 से 1 तक जाने का Google सबसे अच्छा उदाहरण है. सर्च इंजन के क्षेत्र में साल 2000 के दशक के आरंभ से कोई भी इसका कॉम्पिटिटर नहीं है, यह निश्चित रूप से माइक्रोसॉफ्ट और याहू से बहुत अलग है!

अमेरिकियों ने समाजवादी सोच (कमाई के बारे में सोच) से हमें बचाने के साथ साथ प्रतिस्पर्धा का मिथक दिया है। असल में, पूंजीवाद और प्रतिस्पर्धा इससे विपरीत है। पूंजीवाद पूंजी के संचय पर आधारित है, लेकिन पूर्ण प्रतिस्पर्धा के तहत सभी मुनाफे निम्न हो जाते हैं। उद्यमियों के लिए सबक स्पष्ट है: यदि आप स्थायी मूल्यवान व्यवसाय बनाना चाहते हैं, तो पहले से ही परिभाषित कमोडिटी व्यवसाय न बनाएं।

वास्तव में दुनिया कितनी मोनोपोलीटिक्स है? वास्तव में कितनी कॉम्पेटेटिव है? यह कहना मुश्किल है, क्योंकि इन मामलों में हमारी आम सोच उलझन भरी है। बाहर से देखने वालों को, सभी व्यवसाय समान दिखाई दे सकते हैं, इसलिए उनके बीच केवल छोटे अंतर को समझना आसान है।

लेकिन वास्तविकता उससे कहीं अधिक द्विआधारी है। सही प्रतिस्पर्धा और एकाधिकार के बीच एक बड़ा अंतर है, और अधिकांश व्यवसाय आमतौर पर किसी एक के, ज्यादा करीब होते हैं, जो हम आमतौर पर महसूस करते हैं।

भ्रम अनेक तरीकों से बाजार की स्थितियों का वर्णन करने के पूर्वाग्रह से आता है: दोनों एकाधिकारियों और प्रतियोगियों को, सच्चाई की और झुकाव के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

एकाधिकार झूठ बोलता है

मोनोपली करने वाले खुद को बचाने के लिए झूठ बोलते हैं। वे जानते हैं कि अगर उनके इस एकाधिकार के बारे में ज्यादा बात की जाए तो ऑडिट, खातों की जांच, और अन्य तरीके के कागजी हमले किया जा सकते है। चूंकि वे चाहते हैं कि उनके मोनोपली मुनाफे को निरंतर जारी रखा जाए, वे अपने एकाधिकार को छिपाने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं-आमतौर पर अपनी प्रतिस्पर्धा की शक्ति का प्रयोग करके भी कर सकते हैं।

इस बारे में सोचें कि Google अपने व्यवसाय के बारे में कैसे बात करता है। यह निश्चित रूप से मोनोपली करने का दावा नहीं करता। लेकिन क्या यह मोनोपली करता है? खैर, यह निर्भर करता है: मोनोपली में? Google मुख्य रूप से एक सर्च इंजन है। मई 2014 तक, इसका सर्च बाजार लगभग 68% था। (इसके निकटतम प्रतियोगियों, माइक्रोसॉफ्ट और याहू का सर्च मार्केट शेयर क्रमश: 19% और 10% था।) यदि आपको यह पर्याप्त प्रभावशाली नहीं लगता है, तो इस तथ्य पर विचार करें कि “google” शब्द अब एक क्रिया के रूप में ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी शब्दकोश में आधिकारिक रूप से शामिल हो गया है- बिंग के साथ भी यही होने जा रहा है।

लेकिन मान लें कि हम कहते हैं कि Google मुख्य रूप से एक विज्ञापन कंपनी है। इससे चीजों में बदलाव आ जाएगा। यू.एस. सर्च इंजन विज्ञापन बाजार सालाना $ 17 बिलियन डॉलर का है। ऑनलाइन विज्ञापन $ 37 बिलियन डॉलर सालाना, का है। पूरा यू.एस. विज्ञापन बाजार $ 150 बिलियन डॉलर का है। और वैश्विक विज्ञापन बाजार $ 495 बिलियन डॉलर का है। तो अगर Google ने पूरी तरह से यू.एस. सर्च इंजन विज्ञापन का एकाधिकार किया है, तो यह वैश्विक विज्ञापन बाजार का सिर्फ 3.4% होगा। इस तरह से, Google विश्व प्रतिस्पर्धा में एक छोटे से खिलाड़ी की तरह दिखाई देगा।

क्या होगा यदि हम Google को एक प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में देखें? यह काफी सही भी लगता है; अपने सर्च इंजन के अलावा, Google दर्जनों अन्य सॉफ्टवेयर उत्पाद बनाता है, रोबोटिक कारें, एंड्रॉइड फोन आदि। लेकिन Google के राजस्व का 95% सर्च विज्ञापनो से आता है; इसके अन्य उत्पादों ने 2012 में सिर्फ $ 2.35 बिलियन डॉलर की कमाई की, जो की इसके तकनीकी उत्पादों का केवल एक प्रतिशत है। चूंकि उपभोक्ता तकनीक बाजार, दुनिया भर में 964 अरब डॉलर का है, इसलिए Google 0.24% से भी कम का मालिक होगा- अगर एकाधिकार को छोड़ दें। तो Google खुद को एक और तकनीकी कंपनी के रूप में तैयार करे तो इसे सभी प्रकार के कामों से ध्यान हटाना पड़ेगा।

प्रतिस्पर्धी झूठ

गैर-एकाधिकारवादी इसके विपरीत झूठ बोलते हैं: “हम अपने स्वयं के खेल में हैं जिसके हम रेफरी है।” उद्यमी प्रतिस्पर्धा के पैमाने को हमेशा कम करके पक्षपातपूर्ण व्यवहार करते हैं, लेकिन यह स्टार्टअप की सबसे बड़ी गलती है। घातक प्रलोभन आपके बाजार को बेहद संकीर्ण रूप से वर्णित करता है, ताकि आप इस पर परिभाषा के आधार पर हावी हो सकें।

मान लीजिए कि आप एक रेस्तरां शुरू करना चाहते हैं जो पालो अल्टो में ब्रिटिश खाना बनता है। “यह काम पूरी मार्केट में कोई और नहीं कर रहा है,” आप तर्क दे सकते हैं। “हम पूरे बाजार के मालिक है।” लेकिन यह केवल तभी सच है जब पूरा बाजार ब्रिटिश भोजन के लिए विशेष बाजार है। क्या होगा यदि सामान्य बाजार, पालो अल्टो रेस्तरां बाजार ही हो? और क्या होगा यदि आस-पास के शहरों में सभी रेस्तरां इसी बाजार का हिस्सा हों?

ये कठिन प्रश्न हैं, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि आपको इसकी कोई आवश्यकता नहीं है कि आप सभी से यही प्रश्न पूछें। जब आप सुनते हैं कि अधिकतर नए रेस्तरां एक या दो वर्षों में फेल होकर बंद हो जाते हैं, तो आपके मन में एक विचार आता है कि आपका रेस्तरां औरों से कैसे अलग है। आप लोगों को यह समझाने का प्रयास करेंगे कि आप इन सब से कैसे अलग है और यह आपके साथ नहीं होने वाला।

2001 में, पेपैल के मेरे सहकर्मी और मै अक्सर कास्त्रो स्ट्रीट के माउंटेन व्यू में दोपहर का भोजन करते थे। यहाँ पर भारतीय, सुशी और बर्गर आदि सभी प्रकार के भोजन थे। इस रेस्तरा में उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय जैसे भोजन की श्रेणियां भी थी, यहाँ पर सस्ता और महंगा सभी तरह के भोजन विकल्प थे। प्रतिस्पर्धी स्थानीय रेस्तरां बाजार के विपरीत, पेपैल उस समय दुनियां की एकमात्र ईमेल- आधारित पेमेंट कंपनी थी। हमने कास्त्रो स्ट्रीट के रेस्तरां की तुलना में कम लोगों को नौकरी पर रखा था, लेकिन हमारा व्यवसाय उन सभी रेस्तरांओं की तुलना में अधिक कमाता था। एक नया दक्षिण भारतीय रेस्तरां शुरू करना, पैसा बनाने का एक मुश्किल तरीका है। यदि आप प्रतिस्पर्धी वास्तविकता को देखते हैं और छोटे छोटे कारणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो शायद आपका व्यवसाय बने रहने की संभावना नहीं के बराबर होगी।

रचनात्मक उद्योग भी इसी तरह से काम करता हैं। कोई पटकथा लेखक यह स्वीकार नहीं करना चाहता कि उसकी नई फिल्म की स्क्रिप्ट पहले से ही कही पर लिखी जा चुकी है। इसके बजाय, नयी पिच यह है: “यह फिल्म पूरी तरह से नए तरीकों से व विभिन्न रोमांचक कारनामों से भरी हुयी है।” यह सच भी हो सकता है।

गैर-एकाधिकारवादी अपने बाजार को विभिन्न छोटे छोटे बाजारों के रूप में परिभाषित करके अपने सीक्रेट्स को बताने में अति करते हैं:

इसके विपरीत, एकाधिकारवादी अपने बाजार को कई बड़े बाजारों के संघ के रूप में तैयार करके अपने एकाधिकार को छिपाते हैं:

एक एकाधिकारवादी संघ की कहानी वास्तव में कैसी दिखती है? साल 2011 की कांग्रेस सुनवाई में Google चेयरमैन एरिक श्मिट की गवाही के एक बयान पर विचार करें:

हम एक बेहद प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करते है, जिसमें जानकारी पाने के लिए उपभोक्ताओं के पास कई तरह के विकल्प मौजूद हैं।

पीआर से अनुवादित – सादी भाषा में:

Google एक बड़े तालाब में एक छोटी मछली है। हमें किसी भी समय पूरी तरह से निगल लिया जा सकता है। हम वह मोनोपली नहीं हैं जिसे सरकार ढूंढ रही है।

क्रूर लोग

प्रतिस्पर्धी व्यवसाय के साथ समस्या मुनाफे की कमी से भी परे है। कल्पना कीजिए कि आप माउंटेन व्यू के उस रेस्तरां को चला रहे हैं। आप अपने दर्जनों प्रतिस्पर्धियों से अलग नहीं हैं, इसलिए आपको खड़े रहने के लिए कड़ी मेहनत करनी है। यदि आप कम मार्जिन के साथ अच्छा भोजन देते हैं, तो आप शायद कर्मचारियों को सैलरी का भुगतान भी न कर सकें। और आपको अपनी पूरी ताकत लगाने की आवश्यकता होगी: यही कारण है कि छोटे रेस्तरां ने दादी को रजिस्टर में काम करने और बच्चों को बर्तन धोने के लिए रखा हुआ है। रेस्टोरेंट सबसे ऊँचे रेटिंग वाले पायदान पर भी बेहतर परफोर्म नहीं कर पाते हैं, जहां मिशेलिन के स्टार सिस्टम जैसी समीक्षा और रेटिंग व तेज कम्पीटीशन की संस्कृति के माहौल को बनाया है। (फ्रांसीसी शेफ, तीन मिशेलिन स्टार के विजेता बर्नार्ड लोइसाऊ को यह कहते हुए लिखा गया था, “यदि मैं एक स्टार भी खो देता हूं, तो मैं आत्महत्या कर लूँगा।” मिशेलिन ने अपनी रेटिंग बरकरार रखी, लेकिन 2003 में लोइज़ौ ने खुद को मार डाला जब एक प्रतिस्पर्धी फ्रांसीसी डाइनिंग गाइड ने उनके रेस्तरां को डाउनग्रेड किया ।) प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र लोगों को क्रूरता करने या मौत को गले लगाने की ओर धकेल देता है।

Google की मोनोपली अलग तरह की है। चूंकि इसे किसी के साथ प्रतिस्पर्धा करने की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए इसके कर्मचारियों, इसके उत्पादों और पूरी दुनिया पर इसके प्रभाव की देखभाल करने के लिए व्यापक तरीके है। Google का आदर्श वाक्य- “बुरा मत बनो” – यह एक ब्रांडिंग चाल है, या यु कहें की यह एसा व्यवसाय है जो नैतिकता व अपने अस्तित्व को खतरे में डालकर सफल रहा है। व्यवसाय में, पैसा महत्वपूर्ण है या फिर यह सब कुछ है। एकाधिकारवादी पैसे कमाने के अलावा भी अन्य चीज़ों के बारे में सोचते हैं; गैर-एकाधिकारवादी नहीं कर सकते। परफेक्ट कॉम्पीटिशन में, व्यापार आज के मार्जिन पर केंद्रित है कि यह संभवतः लॉन्ग टर्म फ्यूचर के लिए योजना नहीं बना सकता। रोजाना की मारा मारी से केवल एक चीज व्यापार को खड़े रहने दे सकती है: वो है केवल मोलोपाली लाभ।

मोनोपोलि पूंजीवाद

सबके लिए आंतरिक मोनोपोली अच्छी है, लेकिन बाहर के बारे में क्या? क्या समाज के बाकी हिस्सों में बुरे लाभ आते हैं? असल में, हां: लाभ ग्राहकों के पर्स से बाहर आते हैं, और इसलिए मोनोपोली दुत्कारने लायक हैं- लेकिन केवल ऐसी दुनिया में जहां कुछ भी नहीं बदलता है।

एक स्थिर दुनिया में, मोनोपोली सिर्फ एक कमाई का तरीका है। यदि आप किसी चीज़ के लिए बाजार को अपने घेरे में लेते हैं, तो आप कीमत को बढा सकते हैं; दूसरों को आपसे खरीदने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं होगा। मशहूर बोर्ड गेम के बारे में सोचें: खिलाड़ी खिलाड़ियों के आसपास घूमते हैं, लेकिन बोर्ड कभी नहीं बदलता है। एक बेहतर प्रकार की रियल एस्टेट की खोज करके जीतने का कोई तरीका नहीं है। गुणों के मूल्य हर समय तय किए जाते हैं, इसलिए आप उन्हें अपनाने की कोशिश कर सकते हैं।

लेकिन जिस दुनिया में हम रहते हैं वह गतिशील है: नई और बेहतर चीजों का आविष्कार करना संभव है। क्रिएटिव एकाधिकारवादी दुनिया में नयी खोजों के द्वारा ग्राहकों को अधिक विकल्प देते हैं। क्रिएटिव एकाधिकार समाज के बाकी हिस्सों के लिए ही नहीं बल्कि वे इसे बेहतर बनाने के लिए एक शक्तिशाली इंजन का काम करते हैं।

यहां तक कि सरकार भी यह जानती है: यही कारण है कि इसके विभागों में से एक नए आविष्कारों को पेटेंट देकर एकाधिकार बनाने के लिए कड़ी मेहनत करता है और दूसरा उनका अविश्वश्नीय मामलों पर मुकदमा चलाकर शिकार करता है। यह पूछना संभव है कि किसी को भी मोबाइल सॉफ्टवेयर डिजाइन की तरह कुछ सोचने के लिए वास्तव में कानूनी रूप से लागू करने योग्य एकाधिकार से सम्मानित किया जाना चाहिए। लेकिन यह स्पष्ट है कि आईफोन डिजाइन, उत्पादन और विपणन से ऐप्पल के एकाधिकार लाभ की तरह कुछ अधिक लाभ पैदा करने का इनाम कृत्रिम नहीं: ग्राहकों को वास्तव में स्मार्टफोन प्राप्त करने के लिए ज्यादा पैसों का भुगतान करने का विकल्प था, जिसने वास्तव में काम किया।

नए एकाधिकार की गतिशीलता स्वयं बताती है कि पुराने एकाधिकार इनोवेसन क्यों नहीं करते हैं। ऐप्पल के आईओएस के साथ, मोबाइल कंप्यूटिंग के जन्म ने माइक्रोसॉफ्ट के दशक के लंबे ऑपरेटिंग सिस्टम वर्चस्व को नाटकीय रूप से कम कर दिया है। इससे पहले, ’60 और 70 के दशक के आईबीएम के हार्डवेयर एकाधिकार को माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेयर एकाधिकार द्वारा पीछे छोड़ दिया गया था। 20 वीं शताब्दी में एटी एंड टी के पास टेलीफोन सेवा पर एकाधिकार था, लेकिन अब किसी को भी किसी भी प्रदाता से सस्ती सेल फोन योजना मिल सकती है। यदि एकाधिकार व्यवसायों की प्रवृत्ति प्रगति को रोकती है, तो वे खतरनाक होंगे और हम उनका विरोध करेंगे। लेकिन प्रगति का इतिहास निर्भरताओं की जगह बेहतर एकाधिकार व्यवसायों का इतिहास है।

एकाधिकार प्रगति को चलाते हैं क्योंकि वर्षों या यहां तक कि दशकों तक एकाधिकार लाभ के वाडे के साथ साथ इनोवेसन करने के लिए शक्तिशाली प्रोत्साहन देता है। एकाधिकार इनोवेसन को सुरक्षित रख सकते हैं क्योंकि मुनाफा उन्हें लंबी अवधि की योजना बनाने और महत्वाकांक्षी अनुसंधान परियोजनाओं को वित्त पोषित करने में सक्षम बनाता है. वे यह भी जानते है कि प्रतियोगिता से बाहर हुयी कंपनियों के सपने टूट जाते हैं।

अर्थशास्त्री प्रतियोगिता को एक आदर्श तरीके के रूप में मानने के प्रति जुनूनी क्यों हैं? यह इतिहास का एक अवशेष मात्र है। अर्थशास्त्रियों ने 19वीं शताब्दी के भौतिकविदों के काम से गणितीय गणना की नकल बनाई है: वे व्यक्तियों और व्यवसायों को अलग अलग रूप में देखते हैं, न कि अद्वितीय रचनाकारों के रूप में देखते है। उनके सिद्धांत परफेक्ट कॉम्पीटीसन की संतुलन स्थिति का वर्णन करते हैं क्योंकि मॉडल के लिए यह आसान तरीका है, यह बेहतरीन बिजनेस का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। लेकिन यह जानने लायक है कि 19वीं शताब्दी के भौतिकी द्वारा भविष्यवाणी की जाने वाली दीर्घकालिक संतुलन, एक एसा विचार था जिसमें सभी ऊर्जा समान रूप से वितरित की जाती है, और सब कुछ आराम के लिए किया जाता है-जिसे ब्रह्मांड का गर्मी से अंत भी कहा जाता है। थर्मोडायनामिक्स पर जो कुछ भी आपका विचार है, यह एक शक्तिशाली रूपक है: व्यवसाय में, संतुलन का मतलब स्टेसिस है, और स्टेसिस का मतलब मौत है। यदि आपका उद्योग प्रतिस्पर्धी संतुलन में है, तो आपके व्यापार के अंत से दुनिया में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला; कुछ अन्य निर्विवाद प्रतियोगी हमेशा आपकी जगह लेने के लिए तैयार रहेंगे।

सही संतुलन उस शून्य का वर्णन कर सकता है जो अधिकांश ब्रह्मांड है। यह कई व्यवसायों को भी चित्रित कर सकता है। लेकिन हर नई रचना या खोज संतुलन से दूर होती है। आर्थिक सिद्धांत के बाहर वास्तविक दुनिया में, हर व्यवसाय वास्तव में इस हद तक सफल होता है कि यह कुछ अलग नहीं कर सकता है। एकाधिकार भी अपवाद नहीं है। मोनोपोली हर सफल व्यवसाय में है।

टॉल्स्टॉय ने कहा है कि: “सभी खुश परिवार समान हैं; प्रत्येक दुखी परिवार अपने तरीके से नाखुश है। “व्यापार में यह विपरीत है। सभी कामयाब कंपनियां अलग-अलग हैं: प्रत्येक एक अनूठी समस्या को हल करके एकाधिकार प्राप्त करती है। सभी असफल कंपनियां समान हैं: वे प्रतिस्पर्धा से बचने में नाकाम रहती है।

– Credit to Mr. Peter Thiel and His book Zero To One

Hindi Audio Book

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s